त्रिविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर संपूर्ण देश एवं विश्व भर के बुद्ध अनुयायियों के लिए यह क्षण अत्यंत गौरव और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण रहा। करुणा, शांति, अहिंसा और प्रज्ञा के प्रतीक भगवान गौतम बुद्ध की जयंती, ज्ञान प्राप्ति तथा महापरिनिर्वाण—इन तीनों महत्त्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी बुद्ध पूर्णिमा न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि मानवता को सत्य, प्रेम और समरसता का मार्ग दिखाने वाला दिव्य संदेश भी है।
इसी त्रिविध पावन अवसर पर हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर आगमन होना पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। यह आगमन केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की उस प्राचीन बौद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है, जिसकी जड़ें स्वयं तथागत बुद्ध के उपदेशों में निहित हैं।
भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली वह पावन भूमि है, जहाँ तथागत ने अपने अंतिम उपदेश देकर संसार को करुणा, मध्यम मार्ग और आत्मबोध का अमूल्य संदेश दिया। ऐसे दिव्य स्थल पर प्रधानमंत्री जी की उपस्थिति ने न केवल उस भूमि की आध्यात्मिक ऊर्जा को और अधिक प्रखर किया, बल्कि विश्व समुदाय को यह संदेश भी दिया कि भारत आज भी बुद्ध के विचारों को आत्मसात कर मानव कल्याण के मार्ग पर अग्रसर है।

इस पावन अवसर पर परम आदरणीय डॉ. भिक्षु नन्द रतन महाथेरो जी के साथ माननीय प्रधानमंत्री जी के कुछ छाया चित्र अत्यंत प्रेरणादायक और भावविभोर करने वाले हैं। ये छाया चित्र केवल तस्वीरें नहीं, बल्कि धर्म, अध्यात्म और राष्ट्र नेतृत्व के सुंदर समन्वय का सजीव प्रमाण हैं। एक ओर बौद्ध संघ के वरिष्ठ भिक्षु, जिनके जीवन का प्रत्येक क्षण बुद्ध के उपदेशों के प्रचार-प्रसार को समर्पित है, और दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री, जो आधुनिक भारत का नेतृत्व करते हुए भी प्राचीन मूल्यों को समान आदर देते हैं—यह दृश्य अपने आप में ऐतिहासिक है।
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सदैव भगवान बुद्ध के विचारों को वैश्विक मंचों पर प्रमुखता से रखा है। “बुद्ध से युद्ध नहीं, बुद्ध से शांति” का संदेश देते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि आज की दुनिया में हिंसा, द्वेष और संघर्ष का समाधान केवल बुद्ध के करुणा और मैत्री के मार्ग से ही संभव है। उनकी यह यात्रा उसी सोच और दृष्टि का सजीव उदाहरण है।
बुद्ध पूर्णिमा का यह पावन पर्व हमें आत्मचिंतन का अवसर देता है। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता है। भगवान बुद्ध का संदेश—“अप्प दीपो भव” अर्थात स्वयं अपना दीपक बनो—आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना ढाई हजार वर्ष पूर्व था।
इस मंगल अवसर पर प्रस्तुत ये छाया चित्र हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं और हमें यह संकल्प लेने का अवसर देते हैं कि हम अपने जीवन में शांति, करुणा, सहिष्णुता और सत्य को अपनाएँगे। आइए, बुद्ध पूर्णिमा के इस पावन दिन पर हम सब मिलकर एक ऐसे समाज और राष्ट्र के निर्माण का संकल्प लें, जहाँ प्रेम, अहिंसा और मानवता सर्वोपरि हो।
बुद्धपूर्णिमा के इस शुभ अवसर पर आप सभी को हृदय से बहुत-बहुत हार्दिक मंगलकामनाएँ।
भगवान बुद्ध का करुणामय प्रकाश आप सभी के जीवन को आलोकित करे। 🙏